घर तो बस घर होता है

S.Khan February 17, 2017 
हमारा घर हम सबको बड़ा प्यारा होता है। बचपन से लेकर युवावस्था तक के अहम पल घर में ही बीतता है। जहां परिवार के सभी सदस्य एक साथ रहते हैं। खुशी, गम व परेशानी सभी समय सब साथ होते हैं। रहने के लिए अपने घर से बेहतर कोई जगह शायद नहीं होती है। अपवाद स्वरूप कुछ का बचपना घर व परिवार से दूर भी बीतता है। पर घर की याद उन्हें भी खूब ही आती होगी। अपने घर में बिताई गईं बचपन की यादें हमेशा ताजी रहती हैं। चाहे हम घर से दूर कहीं पर भी रहते हों।


कई वर्षों बाद भी घर से बेहतर कोई घर नजर नहीं आता। घर छोटा हो या बड़ा, वहां का सुकून महलों में नहीं। हां, मकान जरूर बनाया जा सकता है, लेकिन इसे घर बनाने में वर्षों लग जाते हैं। बचपन में हममें से कइयों का घर गांवों में भी होगा। जहां कुछ वर्षों पहले तक अधिकतर घर भले ही मिट्टी के थे। लेकिन उसी में सारी खुशियां मिल जाती थीं। आधुनिक सुख सुविधाएं तो नहीं होते थे। पर वह आज के सभी विलासिता की चीजों पर भारी ही पड़ते थे। मटके का या हैंडपंप का पानी ही गला तर कर देता था।



मिठाई की जगह गुड़ या शकर ही मिठास घोला करती थी। गांव में बीते बचपन की यादें जहन में रह-रह कर आती हैं। वे दिन भी क्या दिन होते थे। बचपन के मित्र व उनके साथ गुजरे पल खुशियां ही देते थे। गांव की कच्ची गलियां पक्की सड़कों से ज्यादा आनंद देती थी। अक्सर कई दफा किसी काम से रात के अंधियारे में इन्हीं कच्ची गलियों से गुजरा करते थे। दिन भी बड़े होते और रातें भी। खूब समय होता था। जो अब शायद नहीं दिखता। बचपन में ही कइयों को शहर जाना पड़ता है।

बचपन में शहर में जाना और किसी दूसरे घर में रहने का उत्साह भले रहता हो। पर यह कुछ ही वर्षों में समझ में आने लगता है कि अपना घर और गांव क्या होता है। गांव से शहरी होने पर भी हम गांव नहीं भूल पाते। शायद गांव में जो सुकून व खुशियां मिलती थी, नगरों की चकाचौंध में नहीं मिल पाती हो। पर विकास की रफ्तार के साथ बने रहने के लिए हम सभी को कभी कभी शहरी भी बनना पड़ता है। गांव से हम शहर चले आते हैं।

नए मकानों में रहना शुरू करते हैं। फिर यहां भी मकान घर में तब्दील होने लगता है। और इससे भी लगाव बढ़ जाता है। बचपन में नगरों में पहुंचे बच्चे स्कूल, कॉलेज होते हुए महाविद्यालयों में पहुंचते हैं। इस दौरान बीते समय में शहर से भी जुड़ाव बढ़ जाता है। गांव के बाद शहर भी हमारा घर जैसा होने लगता है। फिर करियर की बारी आती है, जो घर या मकान का पता नहीं देखती। हम सभी इसके आगे लाचार से ही बने रहते हैं। करियर हमें फिर से नया घर ढूढने की राह दिखाती है। फिर एक दिन नए घर की ओर कदम बढ़ ही जाते हैं। नए शहर में हम प्रवेश करते हैं। जो अभी भी सिर्फ एक मकान की तरह ही दिखता है। जो दिखाई तो देता है, पर इसमें क्या-क्या है, नहीं पता होता है। यहां पर हम बसने लगते हैं। पर यहां मकान को घर जैसा बनाने में वक्त काफी लगता है।

कारण कभी इस शहर तो कभी उस नगर जाना और आना। धीरे-धीरे वक्त गुजरता जाता है। तब यही नया शहर अब अपना सा बनने लगता है। नए मकान से नए घर बनाने का दौर शायद उम्र भर ही चलता रहता है। कोई गांव से शहरों में, कोई एक राज्य से दूसरे राज्य में तो कोई एक देश से दूसरे देश में पहुंचता रहता है। नए मकान से नए घर बनते रहते हैं। फिर भी हमारी जड़े जिस जगह की होती हैं, उस नगर या गांव को भूल पाना नामुमकिन सा ही होता है। लेकिन हम चाहकर भी कम ही बार अपने गांवों या नगरों तक पहुंच पाते हैं। सोचते हैं कि अपना ही गांव है। किसी दिन चलेंगे। वहां जाएंगे। सबसे मिलेंगे। गांव में घूमेंगे। सोचते हुए वर्षों बीत जाते हैं।

बीच-बीच में एकाद दिन के लिए गांव के घरों में पहुंचते भी हैं। फिर लौट आते हैं। वक्त बीतता जाता है और हम यह नहीं सोच पाते कि अब कितना समय शेष रह गया है, जो अपने गांव या घरों में सुकून के साथ बिताएंगे। जबतक घरों को लौटते हैं बहुत कुछ बदल गया होता है। कम समय ही बचा होता है। तब इन्हीं कम समय में ही गांव से बिछड़े सारे पलों को जीने का प्रयास करते हैं। पर वो चीज या खुशी शायद ही मिल पाती होगी, जो हम हमेशा अपने गांव या घर में रहकर पा सकते थे। जड़ों की तरफ लौटना तो हमारी प्रवृत्ति है ही। जहां से हम आते हैं, वहां जाने की ख्वाहिश तो रहती ही है। घर या गांव या नगर भी तो हमको याद करता ही है। वहां पर पहुंचने पर इसका अहसास भी होता है। हम ही नहीं हमारा घर, हमारा गांव, हमारा नगर, हमारा परिवार सब हमें याद करते हैं।

हमारे पहुंचने से परिवार तो खुश होता ही है, गांव भी शायद चहक उठता होगा। तेज गति से गुजरते इस युग के समय में शायद हम भूल जाते हैं कि कोई हमें भी याद करता होगा। या हमें भी किसी को याद करना चाहिए। आखिर हमें भी तो एक दिन लौटना ही है। जहां अपना घर व लोग होंगे। खुशियां भी ज्यादा और इसका वक्त भी ज्यादा होगा। जहां किसी मकान को घर बनाने के लिए समय गुजरने की जरूरत नहीं होगी।

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