Quit Tobacco: तंबाकू की रहस्यमयी दुनिया से जरा रूबरू हो लें...

S.Khan Aug. 27, 2017 
बेरोजगारी के इस महान दौर में भी समय बड़ी तेजी से आगे निकला जा रहा है। डिजिटल भारत ने इसे और आसान बना दिया है। फ्री या न्यूनतम दर पर उपलब्ध हो रही इंटरनेट की सुविधा ने समय काटने का नया बहाना थमा थमा दिया है। खैर ये है कि इंटरनेट की इस लत से कुुछ समय गवाने की हानि के अलावा बहुत कुछ जानने, सीखने के भी कई अवसर मिलते हैं। ये उपयोग करने वाले पर ही निर्भर है। बहरहाल, कुछ लत तो सिर्फ नुकसानदायक ही साबित होते हैं। तंबाकू के विभिन्न रूप इसमें शामिल हैं। फिर भी हर वर्ष 20 लाख नए लोग तम्बाकू सेवन (सिगरेट, बीड़ी, गुटखा, खैनी, पैन, मसाला आदि) की शुरुआत करते हैं। 

आप तम्बाकू, सिगरेट, गुटखा, बीड़ी, खैनी से परिचित तो होंगे ही। लोग इसके चपेट में क्यों और कैसे आ जाते हैं या कब नशा करने लगते हैं, इसके अनगिनत रहस्यमयी वजह होते हैं। पर आज तक कुछ ठोस कारण का निर्धारण नहीं हो सका है। दांतों का खराब होना, मुंह की दुर्गंध, सांसों की बदबू सहित अन्तः कैंसर का सबब बनने वाले तम्बाकू पदार्थ का सेवन क्यों शुरू हो जाता है। जबकि अधिकतर लोग इससे अच्छी तरह से वाकिफ ही होते हैं। दोस्तों को, बड़ों को इसका सेवन करते देखकर, झूूठे मनगढ़ंत बातों (इससे तनाव कम होता है, स्फूर्ति आती है, स्मार्ट दिखते हैं, टाइम पास, एकाग्रता बढ़ती है) को  सुन कर या सिनेमा, टीवी पर अपने पसंदीदा एक्टर्स को सिगरेट, सिगार पीते देखकर प्रेरित होकर उन जैसे बनने या दिखने की लालसा में या फिर कोई अन्य कारण भी है? जो चीज सिर्फ और सिर्फ नुकसान ही पहुंचाए उसका आदि कोई कैसे बनने लगता है। वजह अभी भी रहस्य ही है। तम्बाकू उत्पादों (पैकेट्स) पर लिखी चेतावनी भी चेताने के बजाय फोटो बनकर ही रोज हर पल ही अपना दम तोड़ देती है। 


फिल्मों के बीच में एंटी टोबैको का प्रचार और इससे होने वाली बीमारियों को अक्सर दिखाया ही जाता है। टीवी पर भी जब भी सिगरेट, शराब या अन्य नशीले पदार्थों का दृश्य आता है तो चेतावनी दिखाई जाती है। सभी धूम्रपान के पदार्थों पर भी चेतावनी अंकित रहती है। साफ साफ नुकसान को दर्शाया गया होता है। फिर भी लोग इसे अपनाते हैं। जब इससे स्वास्थ्य व समाज को नुुुकसान ही पहुंचता है तो इसे पूरी तरह से बन्द क्यों नहीं कर दिया जाता। ऐसा मांग भी तो हमेशा उठता ही रहता है। खुद शाशन प्रशासन भी तो तम्बाकू उत्पादों का उपयोग नहीं करने के प्रति लोगों को जागरूक करता ही रहता है। स्कूल, कॉलेज हर जगह पर धूम्रपान को गलत ही बताया जाता है। इसके हानिकारक प्रभाव से अवगत कराया जाता है। फिर इसपर रोक क्यों नहीं? जब रोक की बात आती है तो तरह तरह के उपाय और दलीलें भी सुनने देखने को मिलती हैं। जैसे पब्लिक इंटरेस्ट, तम्बाकू किसान, गरीब किसानों की आजीविका आदि जैसे प्रश्न खड़े कर दिए जाते हैं।

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हर दिन तम्बाकू उत्पादों के दुष्प्रभाव से लोग जानलेवा बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। लोगों की बड़ी रकम इलाज में खर्च होता है। कई के तो उम्र भर की कमाई तक लूूूट जाती है। इसपर भी अधिकतर की जान नहीं बच पाती है। लाखों लोग तम्बाकू उत्पादों से होने वाली बीमारियों से पीड़ित होकर जमा पूंजी गवांकर गरीबी रेखा से नीचे चले जाते हैं। जबकि इनके उत्पादक मालामाल होते जा रहे हैं। पब्लिक प्लेस पर धूम्रपान मना है। ऐसी चेतवानी भी कई जगह देखने को मिलती है। तम्बाकू उत्पादों का प्रचार करना मना है। लेकिन जमीनी स्तर पर ये कितना लागू हो पाता हैं। जुर्माने की भी हिदायत दी जाती है। पर इसका असर कहां दिखता है। खुलेआम सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान होता है। कहीं कोई रोक टोक नहीं की जाती है। सभी चेतावनियां महज मजाक बनाकर रख दी जाती हैं। 







क्या आप जानते हैं

विश्व में चीन के बाद भारत में सबसे ज्यादा तंबाकू की खपत होती है। प्रति वर्ष लगभग ९ लाख भारतीय तंबाकू से होने वाली बीमारियों से मौत का शिकार बन जाते हैं। भारत में 275 मिलियन तंबाकू सेवन करने वाले रहते हैं। 42.3 मिलियन लोग तंबाकू के दोनों प्रकार का सेवन करते हैं, धुआं और धुंआ रहित। इसी तरह 163.7 मिलियन लोग सिर्फ धुंआ रहित तंबाकू का उपयोग करते हैं, जैसे खैनी, गुटखा, पान आदि। और 68.9 मिलियन लोग सिर्फ धुंआ वाले तंबाकू उत्पादों का उपयोग करते हैं, जैसे, सिगरेट, बीड़ी आदि। अब इतनी बड़ी आबादी तंबाकू की लत से ग्रसित हैं, जो किसी भी सूरत में अच्छा तो नहीं है। हां, तंबाकू से जुड़े कारोबार करने वालों के लिए ये कराड़ों अरबों रुपए का मुनाफे का कारोबार जरूर है। 
हर 5वां व्यस्क भारतीय खैनी, जर्दा, पान मसाला, गुटखा जैसे धुंआ रहित तंबाकू उत्पादों का सेवन करता है। और हर 10वां व्यस्क बीड़ी, सिग्रेट, हुक्का जैसे धुंआ वाले तंबाकू उत्पादों का सेवन करता है। 3.2 करोड़ व्यस्क तंबाकू के दोनों किस्मों का उपयोग करते हैं। इसके मुताबिक 18 प्रतिशत व्यस्क सिर्फ खैनी, पान, गुटखा आदि का सेवन करते हैं। 7 प्रतिशत सिर्फ बीडी, सिग्रेट, हुक्का आदि पीते हैं। और 4 प्रतिशत व्यस्क लोग तंबाकू के दोनों माध्यमों का उपयोग करते हैं। हालांकि 71 प्रतिशत व्यस्क तंबाकू के किसी भी प्रकार का उपयोग नहीं करते हैं। जो इनसे खुद को सुरक्षित रखे हुए हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा उपयोग
ग्रामीण क्षेत्रों मेें तंबाकू की खपत शहरी क्षेत्रों की तुलना में अधिक है। ग्रामीण क्षेत्रों में 19.9 करोड़ व्यस्क और 6.8 करोड़ व्यस्क शहरी क्षेत्रों के तंबाकू सेवन करते हैं। पुरुषों में 19 प्रतिशत, महिलाओं में 2 प्रतिशत और व्यस्कों में 10.7 प्रतिशत लोग भारत में धुंआ वाले तंबाकू का सेवन करते हैं। इसी तरह पुरुषों में 29.6 प्रतिशत, महिलाओं में 12.8 प्रतिशत और सभी व्यस्कों में 21.4 प्रतिशत धुंआरहित तंबाकू का उपयोग करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के 14.8 करोड़ पुरुष, ग्रामीण क्षेत्रों की 5.1 करोड़ महिलाएं तंबाकू का सेवन करते हैं। शहरी क्षेत्रों के 5.4 करोड़ पुरुष और 1.4 करोड़ महिलाएं तंबाकू का उपयोग करते हैं।

खैनी उत्पाद की ज्यादा खपत
खैनी देश में लगभग हर स्थान पर ही सुलभ हो जाती है। हर प्रदेश में यह किसी न किसी रूप में मिल जाती है। इसका उपयोग करने वाले सर्वाधिक हैं। लगभग 10.4 करोड़ लोग खैनी का सेवन करते हैं। पुरुषों में सामान्य तौर पर खैनी, बीड़ी एवं गुटखा का सेवन सबसे ज्यादा होता है। खैनी 8.5 करोड़, बीड़ी 6.7 करोड़ एवं गुटखा 5.1 करोड़ पुरुष उपयोग करते हैं। कुल 7.2 करोड़ व्यस्क बीड़ी पीते हैं। महिलाएं भी इन उत्पादों का सेवन करती हैं, लेकिन संख्या कम है। इसके तहत खैनी 1.9 करोड़, बीड़ी 2 करोड़, चबाने वाले तंबाकू उत्पाद 2 करोड़ महिलाएं उपयोग करती हैं। इससे सेहत खराब ही होती है।
तंबाकू सेवन से होने वाले नुकसान एवं तंबाकू का सेवन नहीं करने को लेकर विभिन्न स्तरों में जागरुकता अभियान भी चल रहे है। इसका लाभ भी हो रहा है। तंबाकू सेवन करने वालों की संख्या अब धीरे-धीरे ही सही, लेकिन पहले से कम होती जा रही है। वर्ष 2016-17 के ग्लोबल एडल्ट टौबैको सर्वे 2 (गैट्स 2) में गैट्स 1 (2009-10) के सापेक्ष तंबाकू सेवन करने वालों की संख्या में 17 प्रतिशत की गिरवाट दर्ज हुई है। उम्मीद है, यह जारी रहेगी। युवा भी अब इससे दूर हो रहे हैं।  







आमदनी से कहीं ज्यादा खर्चा
सरकार को तंबाकू से होने वाले रेवन्यू पर नजर डालें तो वर्ष 2016-17 में जनवरी माह तक सेंट्रल टैक्स के तौर पर 19 हजार 293 करोड़ रु. का रेवन्यू प्राप्त हुआ। वर्ष 2015-16 में 19 हजार 977 करोड़ रु. और वर्ष 2014-15 में 22 हजार 174 करोड़ रुपए का रेवन्यू प्राप्त हुआ था। जबकि तंबाकू से संबंधित स्वास्थ्य सेवाओं के लिए इससे कहीं ज्यादा खर्च करने पड़ते हैं। इसी कड़ी में राष्ट्रीय तंबाकू कंट्रोल प्रोगाम के तहत वर्ष 2016-17 में 134.80 करोड़ रु. आवंटित हुए। जबकि वर्ष 2014-15 में 80.68 करोड़ रु. और वर्ष 2015-16 में 101.30 करोड़ रु. केंद्र एवं राज्यों को आवंटित हुए थे। 

तंबाकू का सेवन किस दशा में शुरू हो जाती है, ये इसका कोई ठोस कारण तो नहीं है, लेकिन इससे दूर रहने के ढेर सारी वजहें हैं। तो तंबाकू सेवन से दूर रहने में ही भलाई है। क्योंकि इससे सिवाए नुकसान के कुछ हासिल नहीं होता है। इससे होने वाली बीमारियों की चपेट में आने से तो जीवन खत्म होती है, इलाज में भी जीवन भर की जमा पूंजी खत्म हो जाती है। शासकीय अस्पतालों में सुविधा तो हैं इलाज की, लेकिन सभी स्थानों पर नहीं है। और व्यवस्थाओं से आप परिचित भी होंगे। निजी अस्पतालों की भारी भरकम खर्च कुछ गिने चुने लोग ही उठा पाते हैं। ऐसे में बेहतर है कि इससे बचकर ही रहा जाए। टीवी, फिल्मों में आने वाले विज्ञापनों के फेर में न आएं। विज्ञापनों के साथ दिखने वाली चेतावनी पर ही ज्यादा गौर करें। पर्दे या टीवी पर सिग्रेट पीते हुए कोई एक्टर दिखने में अच्छा लग सकता है, लेकिन हकीकत में ये बुहत खराब होता है। नई शुरूआत करें और सिग्रेट, बीड़ी, हुक्का, सुट्टा, खैनी, गुटखा, पान, मसाला, जर्दा का सेवन अब छोड़ दें। बच्चों, युवाओं सहित दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करें। यू ही बस देखकर अनदेखा न करें। अपनी जिम्मेदारी भी निभाएं।

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