एक देश एक कर जीएसटी लागू

S.Khan June 30, 2017  व्यापारियों के विरोध व बंद के बीच आखिरकार देश में जीएसटी एक्ट लागू कर दिया गया। रात ठीक 12 बजे संसद में प्रधानमंत्री व अन्य बड़े लीडर्स की मौजूदगी में जीएसटी को लागू किया गया। इस क्षण को एतिहासिक बनाने के लिए हर मुमकिन कोशिश की गई। आजादी के बाद पहली बार संसद में घंटा बजाकर एक्ट को लागू किया गया। अब देश में एक कर प्रणाली गुड्स एवं सर्विस टैक्स (जीएसटी) ही रहेगी।



जीएसटी लागू होने को लेकर जहां दिन में व्यापारी वर्ग ने रोष जताया, वहीं रात 12 बजते ही कई जगह पठाके फोड़कर जीएसटी का स्वागत भी किया गया। गौरतलब है, कुछ विसंगतियों के चलते व्यापारियों में जीएसटी को लेकर नाराजगी भी है। इसे लेकर व्यापारियों ने शुक्रवार को अपने प्रतिष्ठानों को बंद रखा था। इस दौरान विसंगतियां दूर होने तक एक्ट को स्थगित करने की मांग की गई थी।

बंद का असर भी दिखा। अधिकतर स्थानों पर सुबह से ही कोई दुकान नहीं खुली। व्यापारियों में गहरी नाराजगी बनी हुई है। कई दिनों से व्यापारी जीएसटी के विभिन्न प्रावधानों और इसके लागू करने में की जा रही जल्दबाजी को लेकर विरोध जता रहे थे। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। ऐसे में बंद का आयोजन किया गया, जो लगभग सफल ही रही थी।

व्यापारियों के मुुताबिक जीएसटी अधिनियम में कई विसंगतियां हैं। इससे छोटे एवं मझोले व्यापारियों को काफी परेशानी होगी। माह में तीन बार जानकारियों के पत्रक प्रस्तुत करने हैं। एक दिन विलंब होने पर भी सौ रुपए का अधिभार है। वर्तमान में जो व्यवस्था दशाई गई है वह एकल की जगह बहु बिंदु टैक्स का प्रावधान बताया जा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि जिन विभागीय अधिकारी एवं महकमे को इसे प्रचलन में लाना है, उन्हें भी इस कानून को पूरा ज्ञान नहीं है। व्यापारियों में असंतोष एवं भय का वातावरण है। जीएसटी कानून में व्याप्त कुछ विसंगतियों के समाप्त होने तक इसे स्थगित करने की मांग की जा रही थी।

बहरहाल, गुड्स और सर्विस टैक्स (GST) एक जुलाई से लागू हो गया है। शुक्रवार 30 जून को आधी रात में संसद के सेंट्रल हॉल में हुए कार्यक्रम में इसे लांच किया गया। समारोह में राज्यों के वित्त मंत्री और सांसद आमंत्रित थे। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी पर अपनी बात रखी। प्रधान मंत्री ने जीएसटी को गुड एंड सिंपल टैक्स बताया। मालूूूम हो कि, आजादी के बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब, आधी रात को संसद सत्र लगा है। इसके पूर्व 14 अगस्त 1947 को ही संसद में ऐसा सत्र बुलाया गया था।

जीएसटी कर दर 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत, 28 प्रतिशत में बांटा गया है। जीएसटी अप्रत्यक्ष कर है। इसके तहत वस्तुओं और उत्पादों पर एक प्रकार का समान टैक्स लगाया जाता है। जीएसटी में तीन अंग केंद्रीय जीएसटी (CGST), राज्य जीएसटी (SGST) और इंटीग्रेटेड जीएसटी (IGST) हैं। केंद्रीय और इंटीग्रेटेड जीएसटी केंद्र लागू करेगा एसजीएसटी राज्य लागू करेगा। राज्य के भीतर माल बेचने पर सेंट्रल गुड्स एंड सर्विस टैक्स व स्टेट गूडुस एंड सर्विस टैक्स लगेगा।

कारोबारियों के बीच जीएसटी को लेेेकर विरोध भी है। उन्हें यह बात नागवार गुजर रही कि तैयारी का मौका दिए बगैर इसे लागू किया गया। जीएसटी से दावे किए जाते हैं कि इससे आर्थिक विकास और जीडीपी में एक-दो साल में 2 फीसदी का इजाफा होगा। रोजगार बढ़ेंगे, गरीबी खत्म होगी।भ्रष्टाचार खत्म होगा और काले धन में भी कमी आएगी आदि। वहीं, व्यापारियों की दलील है कि जीएसटी तैयार करने में वर्षों लगे, लेकिन व्यापारियों को तैयारी के लिए समय नहीं दिया गया। सरकार का यह कृत्य दिनदहाड़े डकैती से कम नहीं है। इससे 90 फीसदी छोटे कारोबारी बरबाद हो जाएंगे।

देश में तकरीबन 10 करोड छोटे-मोटे व्यापारी और दुकानदार हैं। इनमें लगभग 60 प्रतिशत कम पढ़े-लिखे व कंप्यूटर से अनभिज्ञ हैं। जबकि जीएसटी की पूरी बुनियाद कंप्यूटर पर खड़ी है। व्यापारियों की आम शिकायत ये भी है कि उनके पास जीएसटी की जरूरी जानकारी नहीं है। दूसरी तरफ उपभोक्ताओं से जुड़े छोटे व्यापारियों को जीएसटी के लिए तैयार करने के कोई मुकम्मल प्रयास किसी स्तर पर नहीं हुए हैं। इनका सारा काम कैश में होता है। इसके चलते ही  छोटे व्यापारी भी सड़क पर उतर विरोध जतानेे को विवश हुए।

सबसे ज्यादा रोष कपड़ा कारोबार में है। जीएसटी के विरुद्ध पहले कपड़ा व्यापारी ही लामबंद और सड़क पर उतरे थे। मिलों से एक बार कपड़ा बाहर आने पर कर नहीं लगता था। व्यापारियों का मानना है कि कपड़े पर जीएसटी लगाकर तुगलकी काम किया गया है। इनकी मांग ये  है टैक्स लगाना है, तो एकल पाइंट पर लगाएं। अलग-अलग स्तर पर टैक्स से परेशानी होगी। जीएसटी में 50 हजार रु. से अधिक माल के ट्रांसपोर्ट के लिए ई-बिल की जरूरत होगी। कपड़े पर प्रथम चरण में ही टैक्स लगना चाहिए। 70 वर्षों से यही व्यवस्था रही है। 

करीब 12 तरह के अपराधों के लिए जीएसटी के तहत गिरफ्तारी का प्रावधान है। दंडात्मक प्रावधानों से व्यापारियों में खौफ है। बहरहाल, जीएसटी लागू हो चुका है। विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाला समय चुनौती पूर्ण हो सकता है। कर लेने वालों के लिए भी और कर देने वालों के लिए भी। पहले किसानों और अब व्यापारियों का बढ़ता अंसतोष शुभ लक्षण नहीं है। जीएसटी को लेकर दुनिया का अनुभव यही बताता है इससे सरकार का कर संग्रह बढ़ता है, कॉरपोरेट को लाभ होता है व आय विषमता बढ़ती है।  

कुछ खास, एक नजर...

इन देशों में जीएसटी से जीडीपी गिरी
वर्ष 1999 से 2000 के बीच जापान, मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा व सिंगापुर जीएसटी लागू हुआ। सिंगापुर ने जीएसटी लागू किया तो उस वर्ष जीडीपी में गिरावट दर्ज हुई। आईएमएफ के मुताबिक जीएसटी लागू होने से पहले सिंगापुर की जीडीपी 5.5 प्रतिशत थी, जो जीएसटी को लागू करने के बाद यह नकारात्मक चली गई और -3 प्रतिशत लुढ़क गई।

चार तरीकों से वसूला जाएगा कर 
कुल 4 तरह का जीएसटी काम करेगा। इसमें सीजीएसटी, एसजीएसटी, आईजीएसटी और यूटीजीएसटी शामिल है। सीजीएसटी केंद्र सरकार वसूलेगा। सीजीएसटी सर्विस टैक्स, एक्ससाइज ड्यूटी, काउंटर वैलिंग ड्यूटी, स्पेशल एडीशनल ड्यूटी, एडीशनल ड्यूटीज ऑफ एक्ससाइज की जगह लेगा। एक राज्य के बीच सप्लाई के दौरान वसूली होगी। एसजीएसटी राज्य सरकारें वसूलेंगी। एसजीएसटी वैट, सेल्स टैक्स, लग्जरी टैक्स, इंट्री टैक्स, एंटरटेनमेंट टैक्स, पर्चेज टैक्स की जगह लेगा। एक राज्य के बीच सप्लाई पर वसूली होगी। आईजीएसटी केंद्र सरकार वसूलेगी, लेकिन यह राज्यों के साथ शेयर होगा। आईजीएसटी सेंट्रल सेल्स टैक्स की जगह लेगा। दो राज्यों के बीच सप्लाई और इम्पोर्ट पर वसूला जाएगा। यूटीजीएसटी केंद्र शासित प्रदेश वसूलेंगे। यूटीजीएसटी वैट, सेल्स टैक्स, लग्जरी टैक्स, इंट्री टैक्स, एंटरटेनमेंट टैक्स, पर्चेज टैक्स की जगह लेगा। केंद्र शासित प्रदेश के बीच सप्लाई होने पर यह टैक्स लगेगा। 

हिसाब के लिए एक्सेल टेंपलेट
खरीद-बिक्री का हिसाब रखने के लिए एक्सेल टेंपलेट लांच किया गया है। डाउनलोड करके इसमें नियमित रूप से डाटा फीड कर सकते हैं। रिटर्न का ऑफलाइन टूल 15 जुलाई को लांच होगा। उस टूल में एक्सेल टेंपलेट का डाटा इंपोर्ट हो जाएगा। फिर उसे रिटर्न के रूप में अपलोड किया जा सकता है। इससे कंप्लायंस बहुत आसान होने की उम्मीद है। 

अब जुलाई 'जीएसटी दिवस'
जीएसटी संसद के सेंट्रल हॉल से शुक्रवार रात ठीक 12 बजे लागू हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इसे लांच किया। पीएम मोदी ने कहा जीएसटी आर्थिक आजादी है। जीएसटी का मतलब गुड एंड सिंपल टैक्स है। सवा सौ करोड़ देशवासी इस एतिहासिक पल के गवाह हैं। प्रणब मुखर्जी ने कहा ये भी गौर करने लायक बात है कि जीएसटी काउंसिल की 18 बैठकें हुईं। और उनमें सारे फैसले आम सहमति से लिए गए। वर्षों पहले शुरू हुए इस लंबे सफर के पूरा होने का यह एतिहासिक अवसर है। 

सभी की लगी थी निगाहें
जीएसटी को लेकर देशभर की निगाहे शुक्रवार शाम से ही टीवी एवं इंटरनेट पर थी। रात को लगभग अधिकतर घरों में टीवी स्क्रीन पर संसद में चल रहे समारोह के दृश्य ही नजर आए। हर कोई इस एतिहासिक पल में शामिल होने को आतुर दिखा। लोगों ने प्रधान मंत्री, राष्ट्रपती और प्रमुख लीडर्स की भाषणों को भी बड़े गौर से सुना। जीएसटी लागू होते ही कई शहरों में आतिबाजी कर खुशी मनाई गई। हालांकि व्यापारियों ने इसके पूर्व अपना विरोध भी जताया था। बहरहाल, जीएसटी लागू होते ही देश में अब एक कर प्रणाली की शुरूआत हुई। 


निभानी होगी जिम्मेदारी  
जीएसटी लागू होने के साथ ही देश मानो समुद्र मंथन की प्रक्रिया से गुजरना शुरू हो गया है। इससे अमृत निकलेगा या विष, इसको लेकर अलग-अलग मत हैं। और यह आने वाला वक्त ही तय करेगा। फिलहाल हम और आप एक जिम्मेदार नागरिक बनकर इस पहल को सफल बना सकते हैं। टैक्स कलेक्शन बढ़ेगा तो देश में प्रसन्नता आएगी। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया पर हमें स्वयं भी नजर रखनी होगी। आम आदमी, सरकारी तत्र, कारोबारी सभी को इस चुनौती पर खरा उतरने के लिए अपनी जिम्मेदारी निभानी है। 

सभी को दिया गया क्रेडिट
कांग्रेस के बायकॉट के चलते पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह संसद में आयोजित समारोह में नहीं पहुंचे। मोदी ने टैक्स रिफॉर्म का क्रेडिट सभी को दिया। उन्होंने कहा  कि जीएसटी किसी एक दल की उपलब्धि नहीं है। यह सांझी विरासत है। जीएसटी से किसी पर भी बोझ नहीं पड़ेगा। देश के गरीबों के हित के लिए यह व्यवस्था ज्यादा सार्थक होगी। टैक्स सिस्टम सरल और पारदर्शी हुआ है। यह सफलता पूरे देश की एकजुटता का ही नतीजा है। 

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