रिपोर्टर्स को पंडितजी और मौलाना साहब ने धो दिया

S.Khan March 13, 2017 
गंगा जमुनी तहजीब हिंदुस्तान की पहचान है। आज बढ़ती साम्प्रदायिकता के दौर में मुल्क की इस खूबी को सहेज कर रखने की जरूरत है। क्योंकि कौमी एकता को नुक्सान पहुंचाने और तोड़ने के लिए कई नाग अक्सर फन काढ़े रहते हैं। हालांकि, सदियों से कायम इस तहजीब ने ऐसे भुजंगों को अपने मुताबिक़ हमेशा कड़ा जवाब भी दिया है। साथ ही बुलंद आवाज में मुल्क की आन बान शान के लिए हर कदम पर एक साथ होने की कई रूप व स्वरूपों में गवाही भी दी है। जहां आजकल भड़काने और बरगलाने वाले बिना ढूंढे मिल जाते हैं, वैसे ही इनसे लाख गुना ज्यादा आपसी मोहब्बत, अमन चैन और भाईचारगी का पैगाम देने वाले भी मिल जाते हैं। पिछले शनिवार को ऐसा ही एक ख़ास दृश्य मप्र. के छोटे से कस्बे सेंधवा में देखने को मिला। जहां क्रिकेट मैच का आयोजन चल रहा था।



पूरा मैदान दूधिया रोशनी से जगमगा रहा था। दर्शकों की तादाद भी हजारों में ही रही होगी। इस स्पर्धा की विशेषता ये थी कि इसमें पंडितजी और मौलाना साहब एक टीम में खेल रहे थे। टीम में सभी खिलाड़ी पंडितजी और मौलाना साहब ही थे। इस टीम के सभी खिलाड़ी अपनी पारंपरिक वेशभूषा में ही मैदान में खेलने उतरे। पंडितजी धोती कुर्ता में तो मौलाना साहब पैजामा कुर्ता में नजर आए। मैदान पर शानदार नजारा था, जो कभी कभी ही दिखता है।

मैंने भी इस तरह का दृश्य पहली बार ही देखा था। पहले मैच में पंडितजी और मौलाना साहब टीम की भिड़ंत पत्रकारों की टीम के साथ होने वाली थी। पत्रकारों की टीम का नाम रिपोर्टर्स 11 था, जिसमे कई खब्बू और धाकड़ खिलाड़ी शामिल थे। सजधज कर अपनी जर्सी में खूब इठलाते रिपोर्टर्स के सभी खिलाड़ी अपना जलवा बिखरने को उतावले हो रहे थे। मैं भी एक कथित पत्रकार ही हूं। सो मैच को लेकर मेरी भी दिलचस्पी कुछ बढ़ गई थी। आखिरकार मेरे पहुंचने के कुछ देर बाद ही मैच शुरू हो गया।

टॉस जीतकर रिपोर्टर्स की टीम ने पहले बैटिंग में हाथ आजमाना पसंद किया। पंडितजी और मौलाना साहब की टीम के 11 खिलाड़ी भी मैदान पर क्षेत्ररक्षण के लिए उतर गए। मैच में बॉलिंग शुरू करने से पूर्व पंडितजी और मौलाना साहब एक दूसरे से एक घेरे में खड़े होकर रणनीति बनाते दिखे कि, कैसे मैच में जल्द से जल्द विकेट हासिल करनी है। वाह क्या दृश्य था, पंडितजी और मौलाना साहब के बीच हो रही गुफ़्तुगू का। एक दूसरे से हाथ मिलाकर, पीठ थपथपाकर खूब हौसला अफजाई की जा रही थी। यही तो हमारे प्यारे मुल्क हिंदुस्तान की पहचान है।

जहां सब भाई-भाई हैं और किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं। बस कुछ मानसिक रूप से बीमार लोग ही आपसी फूट पैदा कर हमारे बीच वैमनस्य बढ़ा देते हैं। वरना, हम हिंदुस्तानी भाई हमेशा मिलजुल कर शांति और सद्भाव के साथ रहने के ही पक्षधर हैं। और इसे ही पसन्द भी करते हैं। बहरहाल, पंडितजी ने मौलाना साहब को गेंद थमाते हुए बॉलिंग की शुरुआत करने को कहा। मौलाना साहब भी गेंद को उछालते हुए बॉलिंग के लिए कदम नापने लगे। बाकी खिलाड़ी भी अपने-अपने स्थान पर फील्डिंग के लिए लग गए। रिपोर्टर्स टीम के दो खिलाड़ी भी चहकते हुए क्रीज पर पहुंच गए।

अम्पायर ने खेल शुरू करने का इशारा किया। दर्शकों ने भी शोर के साथ मैच के आगाज़ होने की पुष्टि की। मौलाना साहब गेंद लेकर दौड़े और बल्लेबाज को अपनी पहली गेंद डाली। रिपोर्टर्स टीम का खिलाड़ी गेंद सूंघ भी नहीं पाया। और गेंद विकेट कीपर के हाथ में पहुंच गई। कमेंटेटर ने भी मौलाना साहब की गेंद की रफ्तार देखकर उन्हें रावलपिंडी एक्सप्रेस के नाम से नवाज दिया। अब तो मौलाना साहब की गेंदों ने और भी रफ्तार पकड़ ली। बेचारे रिपोर्टर्स जैसे-तैसे करके एक-एक रन, दो-दो रन बनाते रहे। इसी तरह अगले ओवर्स में पंडितजी ने भी अपनी घूमती गेंदों से रिपोर्टर्स के बल्लेबाजों को खूब छकाया।

जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ता गया रोमांच भी बढ़ता गया। इस दौरान रिपोर्टर्स के विकेट के गिरने पर पंडितजी और मौलाना साहब जमकर खुशियां मना रहे थे। एक दूसरे से गले मिलकर, हाथ मिलाकर और पीठ थपथापकर टीम का मनोबल बढ़ाया जा रहा था। इस सौहार्द को देखकर हर कोई गदगद हुए जा रहा था। यकीन मानिए हजारों की भीड़ में ज्यादातर या यूं कहें कि सभी दर्शक ही पंडितजी और मौलाना साहब टीम को ही सपोर्ट करते दिखे। अगले ओवर्स में रिपोर्टर्स टीम के विकेटों की झड़ी सी लग गई। मैदान के चारों ओर खड़े दर्शक भी विकेटों के पतन पर झूम उठ रहे थे। धीरे-धीरे मैच और आगे बढ़ा।

और निर्धारित 10 ओवर्स में रिपोर्टर्स की पूरी टीम 70 रन बनाकर ढेर हो गई। अब जवाब में पंडितजी और मौलाना साहब की टीम बैटिंग करने वाली थी। सलामी जोड़ी के रूप में पंडितजी और मौलाना साहब क्रीज पर पहुंचे। दोनों बैट्समेन ने एक दूसरे के साथ पिच के बीच जाकर पारी की ठोस शुरुआत के लिए रणनीति बनाई। रिपोर्टर्स टीम ने भी बॉलिंग के जरिए पंडितजी और मौलाना साहब की टीम को धराशायी करने की योजना बनाई। रिपोर्टर्स टीम के बॉलर ने पहले ओवर में एक-दो गेंदे बड़ी सटीक निकाली। धोती कुर्ता में खेलने पहुंचे पंडितजी भी गेंद की लाइन लेंथ भांप नहीं पाए।

रिपोर्टर्स तो अब हावी होने की सोच बैठे थे, तभी अगली गेंद पर ही पंडितजी ने शानदार कट मारकर स्ट्राइक चेंज कर लिया। अब मौलाना साहब गेंद का सामना करने वाले थे। रिपोर्टर्स टीम के गेंदबाज ने अच्छी गेंद फेकी, लेकिन मौलाना साहब ने 4का जड़ दिया। रिपोर्टर्स टीम के कप्तान ने करीब जाकर बॉलर को कुछ समझाइश दी। इस दौरान पंडितजी और मौलाना साहब ने भी एक-दूसरे से मिलकर आगे की रणनीति बना ली। कप्तान की समझाइश के बाद रिपोर्टर्स के बॉलर ने अगली गेंद फेकी। मौलाना साहब ने इस बार पहले से भी जबरदस्त शॉट खेला और गेंद स्टेडियम पार कर गई।

मैदान में मौजूद दर्शक तो इस शॉट को देखकर मदमस्त हो गए। युवा दर्शक तो मचल उठे। मैदान में झूमते युवाओं की ख़ुशी देखते ही बन रही थी। गौर कीजिएगा, दर्शकों में हर वर्ग के लोग थे, जो पंडितजी और मौलाना साहब का चिल्ला-चिल्ला कर हौसला बढ़ा रहे थे। खैर, तीसरे ओवर में पहले पंडितजी बोल्ड हो गए। फिर मौलाना साहब भी विकेटकीपर को कैच दे बैठे। फिर से रिपोर्टर्स टीम का मैच को लेकर उत्साह चरम पर पहुंच गया। लेकिन असली पिक्चर तो अब शुरू हुई। अब क्रीज पर दोनों छोर पर युवा पंडितजी और नौजवान मौलाना साहब मोर्चा संभाल रहे थे।

दोनों बल्लेबाजों के बीच गजब का ताल मेल दिखा। पंडितजी सिंगल रोटेट करते और मौलाना साहब पिंच हिटर बनकर बोलर्स का बखिया उधेड़ने लगे। मैच 5वें ओवर तक जा पहुंचा। मौलाना साहब स्ट्राइक पर थे। जर्सी और जूते मोज़े से लैस रिपोर्टर्स के युवा गेंदबाज ने ओवर की पहली गेंद डाली। मौलाना साहब ने गेंद को लेग साइड में 4का मार दिया। अगली गेंद पर फिर 6का मार दिया। तीसरी गेंद पर मौलाना साहब ने किसी प्रोफेशनल क्रिकेटर की तरह घुटने को पिच पर टिकाकर गेंद पर करारा प्रहार कर दिया।

गेंद भी सीधे मैदान से बाहर जाकर ही गिरी। अब मैच जीतने के लिए 6 रन चाहिए थे। मौलाना साहब ने अगली गेंद पर सिंगल निकाल लिया। स्ट्राइक पर आए पंडितजी ने भी सिंगल निकालकर मौलाना साहब को खेलने का मौका दिया। मौलाना साहब ने कोई हड़बड़ी नहीं दिखाई और तालमेल और सूझ बूझ से खेलते हुए एक रन लेकर स्ट्राइक बरकरार रखी। पंडितजी और मौलाना साहब की तालमेल ने टीम को जीत की दहलीज पर पहुंचा दी थी। इस खेल ने जो सन्देश दिया, उसे बेहद आसानी से समझा जा सकता है।

फिलहाल, अब 6ठे ओवर की शुरुआत होने वाली थी। पंडितजी और मौलाना साहब की टीम जीत की दहलीज पर थी। फील्डिंग कर रहे रिपोर्टर्स के खिलाड़ी इस दौरान अपने लचर प्रदर्शन को लेकर तरह-तरह के बहाने बनाते नजर आए। बहाने भी कछ कुछ ऐसे थे कि, हम कोई रोज-रोज तो मैच खेलते नहीं। विपक्षी टीम तो रोज क्रिकेट खेलती है। रोज प्रैक्टिस करती है। दर्शक भी इनपर अपने ढंग से लुत्फ़ उठाते रहे। 6ठे ओवर की पहली गेंद फेकने के लिए बॉलर तैयार था। दर्शक भी 6का-6का का शोर मचाने लगे।

लेकिन मौलाना साहब ने तेजी से एक रन बनाकर स्ट्राइक चेंज कर ली। दूसरी गेंद पर पंडित जी ने भी चतुराई भरा शॉट खेलकर रनों की बराबरी कर ली। फिर से स्ट्राइक पर मौलाना साहब थे। दर्शक फिर से बड़ा शॉट देखने के लिए शोर मचाने लगे। मौलाना साहब ने भी गेंद पर करारा प्रहार किया, लेकिन गेंद बल्ले पर ठीक से आई नहीं, और मौलाना साहब ने दौड़कर एक रन बना लिए। जीत का अहसास होते ही बल्लेबाजी कर रहे पंडितजी और मौलाना साहब ख़ुशी से गले मिल गए।

फिर पवेलियन की तरफ तेजी से दौड़ लगा दी, जहां टीम के अन्य खिलाड़ी भी ख़ुशी से उछल रहे थे। खेल देखने पहुंचे दर्शक भी कहां पीछे रहने वाले थे। सैकड़ों दर्शक मैदान में पहुंच गए। पंडितजी और मौलाना साहब की टीम को बधाई देने वालों का तांता लग गया। मैदान पर काफी देर तक खूब खुशियां मनाई गईं। पंडितजी और मौलाना साहब की टीम ने आपसी तालमेल और समझबूझ से रोज नई कहानी गढ़ने वाले रिपोर्टर्स की टीम को करारी शिकस्त दे दी थी। मैच रोमांच से भरपूर होने के साथ-साथ कई बड़े सन्देश भी दे गया।

सद्भावना, भाईचारगी, प्रेम, सौहार्द, कौमी एकता, आपसी तालमेल, समझबूझ, परस्पर विश्वास, टीम भावना और ऐसे ही कई सन्देश इसमें समाहित थे। और यही तो हमारे मुल्क की ख़ास खासियत है। ख़ास पहचान है। जहां हर समुदाय, हर वर्ग बिना भेदभाव के आपस में मिलजुल कर खुशी के साथ रहता है। गंगा-जमुनी तहजीब अनमोल है। हम सभी को हर परिस्थिति में इसे सहेजकर रखना होगा। साथ ही मुल्क की इस बेशकीमती और अद्भुत संस्कृति को चोट पहुंचाने वालों से भी हरपल सतर्क रहना होगा। हम सभी को पंडितजी और मौलाना साहब की टीम की तरह रहना होगा।

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