S.Khan March 15, 2017
बद्रीनाथ की दुल्हनिया फिल्म देखी क्या। मैने तो देख ली है। यह फिल्म सिर्फ गुदगुदाती ही नहीं है। बल्कि कई बड़े संदेश भी देती है। खासकर महिला सशक्तिकरण को लेकर। समाज में महिला की स्थिति, उसकी समस्याएं, मनोदशा, आकांक्षाएं और बुहत सारी बातों का समावेश है बद्रीनाथ की दुल्हनिया फीचर फिल्म में। दहेज एवं इससे परिवार व समाज में बनने वाली स्थितियों को भी दर्शकों से परिचित कराया गया है। फिल्म भी इन्हीं परिस्थितियों के इर्द गिर्द ही चलती रहती है।
वर्तमान समय में भी लड़की के जन्म लेने पर कई परिवारों की चिंता बढ़ जाती। इससे कत्तई इन्कार नहीं किया जा सकता है। चिंता काप्रमुख कारण शादी ब्याह के दौरान देहज की प्रथा का प्रचलन हर समाज में होना है। फिल्म में दो बहने अपनी आकांक्षाओं के मुताबिक जीवन में कुछ करना चाहती हैं। आगे बढऩा चाहती हैं। ठीक उसी तरह जैसे लड़के अपनी इच्छाओं को पूरा करते हैं। लेकिन कई मामलों में बालक एवं बालिकाओं में अंतर आज भी समाज में बना ही हुआ है।
फिल्म में समय एवं परिस्थियां दोनों बहनों का खूब इम्तहान लेते हैं। बद्रीनाथ की दुल्हनिया बद्री को मंडप में छोड़कर चली जाती है। सिर्फ इसलिए क्योंकि वह एक मिसाल बनना चाहती थी, जो अन्य लड़कियों को भी आगे बढऩे के लिए प्रेरित करे। परिवार के लिए कुछ करने के लिए। ठीके वैसे ही जैसे कोई बेटा अपने परिवार के लिए करता है। फिल्म में बद्रीनाथ की दुल्हनिया ने शादी न करके पहले अच्छा करियर बनाया। सिर्फ इसलिए नहीं कि करियर बनाना ही मुख्य इच्छा थी।
बल्कि इसलिए कि कोई पिता अपनी बेटी की शादी में दहेज देने के लिए फिर से विवश न हो। इसके लिए समाज की परवाह किए बिना ही बद्रीनाथ की दुल्हनिया ने हौसले के साथ आगे बढऩे की इच्छा दिखाई। कड़ी मेहनत करती है और आखिरकार वह एक दिन कामयाब होती है। अपने सपने पूरे करती है। पुरुष प्रधान समाज में कइयों को यह बुरा लगता है। या इससे जलन महसूस होती है।
जोकि कत्तई ठीक नहीं लगता। सिर्फ पुरुष प्रधान समाज की मंशा के मुताबिक चलने के लिए महिलाएं अपनी इच्छाओं, हुनर, करियर से समझौता करें। ये ठीक नहीं। महिलाओं को भी बराबरी का हक है। लेकिन सामाजिक कूरीतियां इसमें बड़ी बाधा हैं। खासकर दहेज जैसी समस्या। इसके खिलाफ कानून हैं, लेकिन असर कम ही दिखता है। ब्रदीनाथ की दुल्हनिया फिल्म सिर्फ मनोरंजन हीं नहीं करती, संदेश भी दे रही है। इस संदेश को समझें और समाज में व्याप्त कमियों को दूर करने के लिए स्वयं भी प्रयास करें।

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