S.Khan June 24, 2017
हर साल की तरह इस बार भी ईद की तैयारियां जोरों पर है। जूते चप्पल से लेकर कपड़े तक कि खरीदी बढ़चढ़कर हो रही है। खुशियों के इस त्योहार का अपना ही महत्व है। अपने घर के लोगों के अलावा, गरीबों और जरूरतमंदों का भी खूब ख्याल रखा जा रहा है। ताकि ईद की खुशियों से कोई बन्दा महरूम न रह जाए। बहुत अच्छी बात है, और ऐसा होना भी चाहिए। इस खास मौके पर न कोई गम हो न कोई परेशानी। हो तो बस खुशियां ही खुशियां। अमूमन हर जगह ऐसा ही नजारा दिखता है। पर, आजकल एक अजीब बात भी जरूर ही दिख जाती है। जिसे आम भाषा मे मनमुटाव कहते हैं। जो खुशियों में मंदक की तरह ही काम करता है। जो बिल्कुल भी ईद के मकसद को पूरा नहीं करता। छोटी छोटी बातों पर ही नाराजगी है। जिसे बनाए रखना हम अब शान समझने लगेे हैं। इस ईद इसे दूर करने की कोशिश तो करिए। बहुत दिन हो गए, अब थोड़े गिले शिकवे भी दूर हो जाएं, हर्ज क्या है, आखिर ईद है।
दोस्तों आप भी सोच रहे होंगे कि बड़े दिनों बाद ब्लॉग पर आया हूं। इसके लिए मुझे खेद है। कुछ जरूरी कार्यों में व्यस्त हो गया था। इसलिए ब्लॉग के लिए वक्त नहीं मिल पा रहा था। खैर, अब वापस आपके लिए नियमित रूप से कुछ नई बातों को कलमबद्ध करने की कोशिश करता रहूंगा।बहरहाल, हम बात कर रहे थे ईद की, जो बिल्कुल करीब है। लेकिन, मनमुटाव, आपसी नाराजगी, द्वेष इसकी खुशियों को कम कर रहे हैं या दिखावटी सा बना रहे हैं। तो जरूरत है इस ईद मनमुटाव दूर कर एक दूसरे से गले मिलकर खुशी मनाने की। थोड़े गिले शिकवे भी दूर हो जाएं, तो क्या हर्ज है, आखिर ईद है...।
दोस्तों ब्लॉग लिखते वक्त एक बड़ी खबर ये आ रही थी कि सऊदी में मक्का ग्रांड मास्क को निशाना बनाने की तैयारी कर रहे दहशतगर्दों के मंसूबों को सऊदी सुरक्षा बलों ने नाकाम कर दिया। दोनों तरफ से फायरिंग भी हुई है। इस दौरान एक संदिग्ध ने खुद को विस्फोट कर उड़ा लिया। घटना शुक्रवार की है। सुरक्षा बलों ने महिला सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इसी तरह दूसरी बड़ी खबर ये भी आ रही थी कि 2008 में असेंबली इलेक्शन के दौरान पेड न्यूज के आरोपों से घिरे मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री नरोत्तम मिश्रा को चुनाव आयोग ने अयोग्य घोषित कर दिया है। तीन वर्ष के लिए चुनाव भी नहीं लड़ सकते। जबकि मध्यप्रदेश में दिसंबर 2018 में विधान सभा चुनाव हो सकते हैं। हालांकि मिश्रा ने मीडिया को किसी भी प्रकार की राशि देने से ही इन्कार किया है।
बहरहाल, नापाक मंसूबों पर पानी फिर गया है। और मीडिया जिसे अब कई नामों से पुकारा जाता है। उसी को पेड़ न्यूज देने के चलते मंत्रीजी स्वयं ही परेशानी में पड़ते नजर आ रहे हैं। नेताजी तो कोई न कोई तोड़ निकालने की कोशिश करते ही रहेंगे। फिलहाल हम बात कर रहे थे ईद की। बात ये थी कि हम छोटी-छोटी बांतों को लेकर ही एक दूसरे से द्वेष की भावना रखने लगे हैं। दूरियां बढ़ती जा रही हैं। जो कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इसपर ध्यान देना होगा। जब दूरिया नहीं रहेंगी। सब दिलों के करीब होंगे। किसी से कोई नाराजगी न होगी, किसी से कोई शिकायत न होगी, तभी तो ईद की सही खुशी मिल सकेगी। अन्यथा, मेरी नजर में तो खुशियां महज दिखावा ही होंगी या शेखी भर ही होंगी।
घर-घर जाना तो होगा ही। सलाम दुआ भी खूब होगा। करीबियों के घर आप भी जाएंगे और वे भी आपके यहां आएंगे। लेकिन, इस दफा उनके घर भी जाइए, जहां गए वर्षों हो गए हैं। शायद वे इंतजार कर रहे हों। रंज को अलविदा कहिए। गले मिलकर खटास को दूर करिए। ऐसे न हो कि, घर तो एक दूसरे से मिलकर ईद मना रहे हों, लेकिन इसमें रहने वालों के बीच दूरिया और खटास बरकरार हो। मौका भी अच्छा, पहल तो करिए। आखिर ईद है...।

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