भूखे तेंदुओं से जब गांव में फैली दहशत

S.Khan February 11, 2017 
तेंदुआ एक शानदार जीव है। अक्सर हम इन्हें जू में ही देख पाते हैं। जंगल में भी कम ही लोगों की नजरों में ये आते हैं। छिपकर शिकार करने एवं शिकार को छिपाने में भी ये माहिर होते हैं। लेकिन जंगल अब घटते जा रहे हैं। शिकार भी कम होते जा रहे हैं। ऐसे में तेंदुए कई दफा शिकार की तलाश में गांवों तक पहुंच जाते हैं। जहां वे मवेशियों को अपना शिकार बनाते हैं। भूख लगने पर ये बड़ी चालाकी से रिहायशी क्षेत्रों में पहुंच अपना शिकार चयन करते हैं। ऐसे ही एक वाक्ये का जिक्र करूंगा। जब भूखे तेंदुओं ने जंगल से निकल कर एक गांव में पहुंचकर मवेशियों को अपना शिकार बनाया। सभी दृश्य रोमांचक थे।


 (शिकार के पास तेंदुआ।)

तेंदुओं ने किया गांव का रुख
मप्र में जंगल ज्यादा हैं। इनमें कई प्रकार के जंगली जीव रहते हैं। तेंदुआ, बाघ, भेडिय़ा, लकड़बग्घा आदि प्रमुख हैं। जंगलों में घूमकर रहना और शिकार करना इन्हें खूब भाता है। लेकिन कई दफा शिकार नहीं मिलने पर जंगल में बसे गांवों की ओर रुख करते हैं। ऐसी ही एक सच्ची घटना मप्र के बड़वानी स्थित इनायकी गांव में घटी। गांव में पिछले दो चार दिन से मवेशी गायब हो रहे थे। मवेशी गायब होने का सिलसिला जब नहीं रुका तो पशुपालक परेशान हो उठे। कारण का पता लगाने के लिए पशुपालक व ग्रामीण रात में पहरेदारी भी करने लगे। लेकिग कोई सुराग उनके हाथ नहीं लग रहे थे। मवेशियों एवं खुद की सुरक्षा को लेकर भय बढऩे लगा था। अज्ञात जानवर को लेकर लगातार डर बढ़ रहा था। 
(एक तेंदुआ कहीं गया।)

ग्रामीणों में कायम किया भय 

पहरेदारी के बाद मवेशियों के गायब होने का सिलसिला कुछ दिन के लिए रुका गया। ग्रामीणों में संतोष था कि अब बला टल गई है। तभी गांव से एक बछड़ा फिर गायब हो गया। ग्रामीण व पशुपालक फिर सक्रिय हो गए। तरह-तरह की आशंकाएं उन्हें डराने व सताने लगीं। लोगों का डर तब और बढ़ गया, जब रात के सन्नाटे में किसी अनजान जानवर की डरावनी गर्जना व गर्राहट की आवाजें रुक-रुक कर गूंजने लगी थी। लोग अब अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क होने लगें। वन अमले को भी मामले से अवगत करा दिया गया। ग्रामीणों की रात अब डर व आशंकाओं के बीच गुजरने लगी। दिन में ग्रामीण मवेशियों की गिनती करते। सब ठीक होने पर ही राहत की सांस लेते। इसी दौरान एक रात एक बछड़ा गायब हो गया। सुबह ग्रामीणों को इसकी जानकारी हुई तो उनमें खौफ छा गया। अब लोगों ने दल बनाकर एक साथ रहने का निर्णय लिया। और मवेशियों के गायब होने का कारण पता लगाने के लिए शुरूआत की गई। वन अमले से भी मदद मांगी गई। 

(शिकार के पास जाता तेंदुआ)



सूरज ढलते ही दुबक जाते लोग

लोगों की किसी जानवर के होने की आशंका तो थी, लेकिन कौस सा जानवर है, इसकी पुष्टि नहीं पो रही थी। ग्रामीण अब रात में आग जलाकर सोते और मवेशियों की देखभाल करते। सूरज ढलते ही लोग घरों में लौट जाते। रात में किसी को बाहर जाना होता तो उसके साथ लाठी डंडे से लैस कई अन्य लोग भी जाते। जानवर का पता नहीं लगने से वन अमला भी परेशान था। अब जानवर का पता लगाने के लिए कवायद तेज कर दी गईं। गांव के आसपास जंगल में कैमरे भी लगवा दिए गए। ग्रामीण भी रोज जंगल में सुराग ढूंढते। इसी दौरान जंगल में मौजूद एक गड्ढे में मवेशी के अस्थि पंजर नजर आए। ग्रामीणों की आशंका अब हकीकत में बदलने लगी थी कि यह कोई भयानक जानवर होगा।

 (पेट भरता तेंदुआ की जोड़ी)

तस्वीरें देख सब पड़े हैरत में

दिन गुजर रहे थे। पर जानवर सामने नहीं आ रहा था। चुपचाप शिकार कर अपना पेट भर रहा था। तभी एक दिन कैमरों में आईं तस्वीरों को देखकर वन अमला व ग्रामीण चौंक गए। तस्वीरें देखकर सभी हैरत में थे। आखिरकार दहशत का पर्याय बना अज्ञात जानवर तेंदुआ साबित हुआ। वह भी एक नहीं बल्कि दो-दो। तस्वीरें भी खास थीं। क्योंकि इनमें तेंदुआ की जोड़ी अपने शिकार से पेट भर रहा था। तेंदुओं ने बछड़े का शिकार किया था। गांव से उसे जंगल में ले जाकर छिपाया था। रात के समय वे शिकार से पेट भरते थे। जानवर की पुष्टि होते ही गांव में सतर्कता बढ़ा दी है। गांव के पास तेंदुआ होने की बात जानकर ग्रामीणों में भय था। अब डरे सहमें लोगों को इंतजार था कि कब इन्हें पकड़ा जाएगा।

 (ट्रैप कैमरे को देखता तेंदुआ)

चाल समझ गए थे तेंदुए

तेंदुआ की जोड़ी को पकडऩे के प्रयास जल्द ही शुरू कर दिए गए। पिजड़ा व उसमें शिकार की व्यवस्था कर दी गई। लेकिन तेंदुए इस चाल को शायद समझ रहे थे। कई दिनों तक वे पिजड़े के करीब भी नहीं आए। टैप कैमरे भी लगातार निगरानी कर रहे थे।  लेकिन कामयाबी नहीं मिल रही थी। पिजड़े के काफी दूरी से लोग भी तेंदुओं के आने का रोज इंतजार करते। दिन बीतता गया। निराश बढ़ती जा रही थी। भय का माहौल अभी भी बना हुआ था।

(शिकार की तरफ बढ़ता तेंदुआ)
तभी तेंदुओं ने कर दी गलती
तभी मेहनत रंग लाई और भूखे तेंदुए चाल में फंस गए। शिकार पर वार करते ही वे पिजड़े में कैद थे। कैद होते ही उनका गुस्सा बढ़ गया। गुर्राती आवाज, दहाड़ती नाराजगी, सुर्ख आंखे, तेज सांसे तेंदुए की शान बता रही थीं। पिजड़े का कपकपाना इस शानदार जीव की ताकत का दर्शा रहीं थीं। पर अब वे पिजड़े में कैद थे। लोग उन्हें देखने के लिए उमड़ रहे थे। गुर्राहट सुनकर भी अब लोगों को डर नहीं लग रहा था, क्योंकि अब तेंदुए कैद में थे। तेंदुओं की इस शानदार जोड़ी को गांव से बहुत दूर अन्य जंगल में फिर से छोड़ दिया गया। तब से गांव में फिर ऐसा कोई किस्सा सुनने को नहीं मिला। दिनचर्या पटरी पर लौट आई।

(जंगल की ओर जाता तेंदुआ)

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